सूर्य की पुत्री यमुना शापित होकर नदी के रूप में अपने उद्गम स्थल हिमालय से प्रवाहित होती हुई विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करते हुए मथुरा पहुंची। यहां यमुना महारानी ने विश्राम (विश्राम घाट) किया। यमुना के ज्येष्ठ भ्राता और सूर्यपुत्र यमराज बहिन यमुना से मिलने आए। यहां भाई-बहिन का भावुक मिलन हुआ। यमुना ने भाई के माथे पर मंगल तिलक किया तो यमराज ने बहिन से उपहार मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि जिस स्थान पर हमारा मिलन हुआ है वहां कोई भी भाई बहिन मेरे जल में स्नान करेगा तो वो यमलोक के कष्टों (यम की फांस) से मुक्त हो जाए। प्रसन्न यमराज ने यमुना को उपहार स्वरूप वरदान प्रदान किया। तभी से प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को बहिन-भाई एक साथ यमुना में स्नान करने को आते हैं।
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यमुना के 25 घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर्व
को मनाते हैं। स्नान के बाद विश्राम घाट स्थित यमुना महारानी व धर्मराज मंदिर में
पूजा अर्चना कर वस्त्र, श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद बहिनें
भाइयों के तिलक करती हैं भाई उन्हें उपहार प्रदान करते हैं।
विश्राम घाट पर श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर तैयारियां शुरू
हो गई हैं। मथुरा नगर पालिका की चैयरमेन मनीषा गुप्ता विश्राम घाट पहुंची। अधीनस्थों
को को साफ़ सफाई से लेकर विधुत व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए । नगर
पालिका की तरफ से यमुना के घाटों से 200 मजदूरों के
द्वारा सिल्ट को निकलवाया गया घाटों की सफाई भी की गयी
नगर पालिका की चैयरमेन मनीषा गुप्ता ने बताया
की हर वर्ष की भांती इस बार 50नाव, 20 गोताखोर
और 4 स्टीमरों
को 1 तारीख
को होने वाले स्नान के लिए लगाया जाएगा। बंद पड़ी लाइट को दुरुस्त कराया जाएगा, साथ ही महिलाओं के लिए स्नान घर,चेंजिंग
रूम, टॉयलेट
की भी व्यवस्था नगर पालिका के द्वारा की जायेगी। सभी घाटों को बेरिकेटिंग से कवर
किया जाएगा, जिससे
कोई भी अप्रिय घटना ना हो

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