आरती

Lakshmi arti Laxmi jI ki Aarti – लक्ष्मी जी की आरती

जय लक्ष्मी मातामैया जय लक्ष्मी माता  
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही हो जग-माता  
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता  
जो को‌ई तुमको ध्यावत, ऋद्घि-सिद्घि धन पाता
जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल बसंती, तुम ही शुभदाता  
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता
जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहती, सब सद्‍गुण आता  
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ होवे, वस्त्र को‌ई पाता  
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता
जय लक्ष्मी माता
शुभ-गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता  
रत्‍न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
जय लक्ष्मी माता
श्री महालक्ष्मीजी की आरती, जो को‌ई नर गाता  
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
जय लक्ष्मी माता

Hanuman Ji ki Arti – हनुमान जी की आरती

आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..
जाके बल से गिरिवर काँपे
रोग दोष जाके निकट झाँके .
अंजनि पुत्र महा बलदायी
संतन के प्रभु सदा सहायी ..
आरति कीजै हनुमान लला की .
दे बीड़ा रघुनाथ पठाये
लंका जाय सिया सुधि लाये .
लंका कोटि समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार लाई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .
लंका जारि असुर संघारे
सिया रामजी के काज संवारे .
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आन संजीवन प्राण उबारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .
पैठि पाताल तोड़ि यम कारे
अहिरावन की भुजा उखारे .
बाँये भुजा असुरदल मारे
दाहिने भुजा संत जन तारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .
सुर नर मुनि जन आरति उतारे
जय जय जय हनुमान उचारे .
कंचन थार कपूर छाई
आरती करति अंजना माई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .
जो हनुमान जी की आरति गावे
बसि वैकुण्ठ परम पद पावे .
आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..


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